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June 23, 2021

370 हटे या नहीं कश्मीर के हिंदुओं के हिस्से मौत ही लिखी है

370 हटे या नहीं कश्मीर के हिंदुओं के हिस्से मौत ही लिखी है

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कश्मीर में हिंदू होना गुणाह है. क्योंकि अगर आप हिंदू हैं और कश्मीर में ज़िंदा हैं, तो आतंकी कब आप की हत्या कर दें पता भी नहीं चलेगा. दरसल मैं आप को कहानी बताने लगूं उस से पहले बता दूं कि बीते कल को भाजपा नेता राकेश पंडित की गोली मार कर हत्या कर दी गई. राकेश पंडित बिना सुरक्षा के दोस्त से मिलने जा रहे थे.

इस से पहले भी अयूब खान पंडित को भी AK PANDIT “हिंदू” समझ कर भीड़ ने मार डाला था. कश्मीर में आतंकी कोई बाहर से थोड़ी न आते हैं हत्या करने के लिए. वो क्या इतने बड़े गुप्तचर हैं कि उन्हे फौज से ज्यादा कश्मीर के हिंदुओं की डिटेल पता हो. दरसल कश्मीर में जब भी हिंदुस्तान के लिए आवाज़ बुलंद होने लगती है तो वहां के लोगों में मजहबी ज़हर भर के उन्हे उकसा के आम लोगों को मरवा दिया जाता है.

और फिर बताया दिया जाता है आतंकवादी मार गए. क्योंकि मैं खुद इन कहानियों का गवाह रहा हूं. क्योंकि आतंकवादी तो कुछ गिने चुने हैं. वो खुद सुरक्षाबलों से बचते फिरते हैं. उनको लोकल लोग जो देश से नफरत करते हैं वो स्पोर्ट करते हैं. उनका साथ देने वाले जब तक घर के भेदी रहेंगे तब तक हिंदुओं को मौत ही नसीब होनी है. फिर चाहे 370 धारा टूटे या कुछ और टूटे.

केंद्र सरकार आज भी कश्मीरियों को अपना बनाने में नाकाम रही है. आप सोच रहे होंगे कि केंद्र कश्मीर को अपना कैसे बनाए. केंद्र को कश्मीर के उन लड़कों को जो हिंदुस्तान से प्यार करते हैं उन्हे आगे लाने की ज़रूरत है ना कि नफरत करने वालों को मुफ्त की सेवा देकर उनको और मज़बूत करने की ज़रूरत. कश्मीर में ज्यादातर नौकरी हिंदुस्तान से नफरत करने वालों के पास है.

देश से प्यार करने वाले लोग दर बदर की ठोकरें खा रहे हैं. कश्मीर में हिंदुस्तान और हिंदुओं को बचाने के लिए वहां पनन कश्मीर की मांग को पूरा करने की जरूरत है. वहीं दूसरी तरफ उन अंदर के घुसपेठियों को पहचानने की ज़रूरत है जो कश्मीर को लूट कर अपने घर भर के बच्चों को आतंकवाद की और धकेल रहे हैं. कश्मीर के मुद्दे पर केंद्र को सरेंडर करने के बजाए वहां राष्ट्रवाद को तरजीह देने की ज़रूरत है.

अलगाववादी अब सीधे सीधे सामने ना आकर पीछे से वार कर रहे हैं. आतंकवादी और बेरोज़गार युवाओं का सहारा लेकर वो कश्मीर को फिर से छल्ली छल्ली करना चाहते हैं. उनको लगने लगा है कि अब हम सीधे सीधे मोदी से जीत नहीं सकते तो हमें ये जंग दूसरों के कंधे पर लड़नी चाहिए. कश्मीर में देश से प्यार करने वाला मुसलमान भी हिंदुओं की तरह डर और खौफ के साये में जी रहा है. उसे भी लगता है कि ये न हो कि मुझे भी मौत की नींद सुला दिया जाए.

कश्मीर को डर के साए से निकालने के लिए आर्मी की नहीं वहां लोगों की ज़रूरत है जो एक दूसरे को सहारा दे सकें. क्योंकि अलगाववादी लोगों को मार के खौफ पैदा करके भगाना चाहते हैं वहां से देश को प्यार करने वालों को. वहां के बचे खुचे भाईचारे को. वहां सबसे ज्यादा अगर परिवर्तन करना है तो सबसे पहले वहां कि शिक्षा व्यवस्था को बदलना होगा.

जहां हिंदुस्तान से नफरत सिखाई जाती है. जब वहां प्यार सिखाया जाएगा तो भाईचारा भी वापिस आएगा. कश्मीर कि शिक्षा में राष्ट्रवाद की लो जलाने से ही वहां की आने वाली पीढ़ी को बचा सकते हैं. वरना पत्थरबाज़ पैदा होने कभी बंद नहीं होंगे सेना जितना भी ज़ोर लगा ले. कितने पंडित मारे जाएंगे इसकी गिनती कभी खत्म नहीं होगी अगर अभी भी कुछ ठोस न किया गया तो फिर 370 हटे या नहीं कश्मीर के हिंदुओं के हिस्से मौत ही लिखी है.

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