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August 5, 2021

अपनी सीट हारने के बाद भी ममता बनेंगी मुख्यमंत्री

अपनी सीट हारने के बाद भी ममता बनेंगी मुख्यमंत्री

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बहुत से लोगों के मन में सवाल उठता होगा की पश्चिम बंगाल में विधान परिषद भी नहीं है तो फिर ममता दोबारा कैसे मुख्यमंत्री बनेंगी. अगर आप को जानना है तो हम आप को समझाते है कैसे. दरसल भारत के संविधान में प्रवधान है कि आप बिना चुनाव जीते भी प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री बन सकते हैं.

लेकिन आप को उसके 6 महीने के अंदर अंदर चुनाव जीतना होगा. चाहे आप विधान परिषद का चुनाव जीतें विधान सभा का, अब बंगाल में विधान सभा ही है, परिषद नहीं तो ममता दीदी का क्या होगा. अब जहां ममता दीदी ने 200 से ज्यादा सीटें जीती अपनी सीट हार गई वहां पार्टी कोई भी कार्यकर्ता अपनी सीट की बली देकर ममता बनर्जी के लिए कुर्बान होना चाहेगा. जिस सीट से ममता दीदी फिर से लड़कर जीत सकेंगी. अगर ममता फिर से चुनाव हार जाएं तब जाकर उन्हे मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़नी ही पड़ेगी.

लेकिन ऐसा होना असंभव ही लगता है. हां ऐसा हुआ ज़रूर है, झारखंड के मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के साथ ऐसा हो चुका है वो मुख्यमंत्री होते हुए चुनाव हार गए थे जिसके बाद उन्हे मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़नी पड़ी थी. मुख्यमंत्री होते हुए तो हिमाचल के मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल भी मुख्यमंत्री होते हुए चुनाव हार गए थे उसके बाद जयराम ठाकुर को मुख्यमंत्री बनाया गया था. लेकिन धूमल पार्टी के सर्वे सर्वा नहीं थे. ममता की पार्टी ममता से ही है. धूमल भी बन सकते थे और 6 महीने के लिए उन्हे भी समय मिल सकता था.

लेकिन बीजेपी ने उन्हे दोबारा मौका नहीं दिया. क्योंकि बाजपा एक बड़ी और नेशनल पार्टी है. ममता की एक रीजनल पार्टी है जिसे ममता ने ही बनाया है. झारखंड के मुख्यमंत्री शिबू सोरेन की तरह अगर जनता फिर से ममता को रिजेक्ट कर दे तो तभी ममता सीएम पद से हट सकती हैं. लेकिन ऐसा होगा नहीं. अब ममता अगर फिर से नंदीग्राम से भी खड़ी हो जाएं तो भी जीत जाएंगी, लेकिन अब सुवेंदू अधिकारी तो सीट छोड़ेंगे नहीं. ज़ाहिर सी बात है ममता अब किसी भी सीट से लड़ेंगी और जीत जाएंगी.

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