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June 23, 2021

कोरोना महामारी के दौरान ध्यान रखें ये जरूरी बातें

कोरोना महामारी के दौरान ध्यान रखें ये जरूरी बातें

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होम क्वारंटाइन के दौरान ध्यान रखें ये जरूरी बातें, जानें कब अस्पताल जाना होता है जरूरी इन सूरतों में अस्पताल का रुख करें. घर पर पृथक रह रहे मरीज लगातार डॉक्टर के संपर्क में रहें, ऑक्सीमीटर के जरिये शरीर में ऑक्सीजन के स्तर की निगरानी करें, अगर ऑक्सीजन का स्तर 94 या उससे नीचे चला जाए या फिर सीने में दर्द, कमजोरी की शिकायत सताए तो फौरन अस्पताल जाएं.

कोरोना की चपेट में आए सभी मरीजों को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं. 85 से 90 फीसदी संक्रमित घर पर ही इलाज कराकर वायरस से उबर सकते हैं, बशर्ते वे कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के उपायों को अमल में लाएं.

आरटी-पीसीआर जांच तभी करवानी चाहिए जब, सर्दी, खांसी, जुकाम, बुखार, गले में खराश, थकान, सांस लेने में तकलीफ या स्वाद और गंध महसूस करने की क्षमता खो जाने पर व्यक्ति दो से तीन दिन के भीतर आरटी-पीसीआर जांच कराकर इस बात की पुष्टि कर सकता है कि कहीं वह कोरोना संक्रमण की चपेट में तो नहीं आ गया है.

कई बार नाक-गले से सही तरह से पर्याप्त ‘स्वैब नमूना’ न लेने या लैब तक परिवहन में चूक होने के कारण आरटी-पीसीआर जांच गलत रिपोर्ट दे सकती है. ऐसे में डॉक्टर की सुझाई दवाएं लेने के बावजूद राहत न मिले तो पृथक रहते हुए लक्षणों पर नजर रखें.

बेवजह सीटी स्कैन कराने से बचें, कोविड-19 की पुष्टि के बाद कई लोग फेफड़ों पर इसका असर जानने की जल्दबाजी में सीटी स्कैन करा रहे हैं, हालांकि, हल्के या मध्यम संक्रमण के मामलों में यह जांच जरूरी नहीं. उन्होंने आगाह किया कि एक सीटी स्कैन सीने के 300 से 400 एक्स-रे कराने के बराबर है.

यानी इंसान एक सीटी स्कैन में 300 से 400 एक्स-रे में निकलने वाली रेडिएशन के संपर्क में आता है. इससे आगे चलकर उसके कैंसर का शिकार होने का खतरा बढ़ जाता है. विशेषज्ञों ने छह मिनट का ‘वॉकिंग टेस्ट’ सुझाया है, जिससे शरीर में ऑक्सीजन का स्तर आंका जा सकता है. चहलकदमी शुरू करने के पहले और बाद में ऑक्सीमीटर से ऑक्सीजन का स्तर नापें.

अगर इसमें सुधार के बजाय गिरावट दिखे और यह अंतर तीन फीसदी या उससे अधिक हो तो इसे चेतावनी के तौर पर लें. यहीं नहीं, अगर छह मिनट की चहलकदमी पूरी होने से पहले ही आप हांफ जाएं तो समझिए कि शरीर में ऑक्सीजन की कमी हो रही है.

दोनों ही सूरतों में आपको चिकित्सकों की देखरेख में मेडिकल ऑक्सीजन लेने की जरूरत पड़ सकती है. विशेषज्ञों ने चेताया है कि संक्रमण के शुरुआती दौर में स्टेरॉयड लेने से सार्स-कोव-2 वायरस को अपनी संख्या बढ़ाने में मदद मिलती है। मरीज गंभीर वायरल निमोनिया का भी शिकार हो सकता है.

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने यह भी स्पष्ट किया कि रेमडेसिविर जैसी एंटी-वायरल दवाएं, प्लाज्मा थेरेपी और टोसीलीजुमैब सरीखे इम्युनोसप्रेसिव इंजेक्शन सिर्फ आपात स्थितियों के लिए हैं. कोविड-19 के इलाज में इनका इस्तेमाल अस्पतालों में चिकित्सकीय देखरेख में ही किया जाना चाहिए. घर पर इन इलाज पद्धतियों को अपनाना जानलेवा साबित हो सकता है.

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