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September 24, 2021

ICMR की प्लाज्मा थेरेपी को ना, कोरोना के इलाज में नहीं है कारगर

ICMR की प्लाज्मा थेरेपी को ना, कोरोना के इलाज में नहीं है कारगर

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बहुत दिनों के ड्रामे के बाद आखिरकार प्लाज़मा थिरेपी (plasma therapy) को bye bye बोल दिया गया. हकीकत तो ये है कि कोरोना के मामले में प्लाज़्मा (plasma) का इस्तेमाल सिर्फ मरीज़ के रिश्तेदारों के लिए आस बांद कर रखने के लिए था. जिसका कोई खास वैज्ञानिक आधार नहीं है. अमेरिका, ब्रिटेन और अर्जेंटीना जैसे देशों में हज़ारों लोगों और हुई स्टडी में इसे बेकार माना गया है लेकिन भारत के डॉक्टर्स और मरीजों के तीमारदार हैं कि मानते नहीं.

डॉक्टर लिख के दे रहे हैं और मरीजों के तीमारदार दौड़ लगा रहे हैं. प्लाज्मा (plasma) के बेरोकटोक इस्तेमाल से वायरस में म्युटेशन अलग से बढ़ रहा है और तो और अस्पताल साथ मे ये शर्त लगा देते हैं कि प्लाज़्मा (plasma) देने वाला ज़्यादा से ज़्यादा 1 महीने पहले कोविड (covid) से ठीक हुआ हो. गजब ये है की वैक्सीन में तो 12 से 16 हफ्ते कर दिए यहां 1 के अंदर बता कर बला टाल रहे थे. अरे भाई एंटीबाडी नहीं बनी होगी तो महीने भर पहले ठीक हुए बंदे में भी नहीं होगी और एंटीबॉडी होगी तो साल भर पहले ठीक हुए बंदे में भी होगी.

लेकिन अब सहारा और उम्मीद के लिए डॉक्टर प्लाज़मा (plasma) के लिए बोल देते थे. आईसीएमआर (ICMR) और एम्स ने कोविड (covid) मरीजों के इलाज के लिए नई गाइडलाइंस जारी की हैं. पिछले एक साल से ही प्लाज्मा थेरेपी (plasma therapy) मरीजों को दी जा रही थी. अप्रैल महीने में शुरू हुई दूसरी लहर के दौरान इसकी मांग काफी ज्यादा बढ़ गई थी. हालांकि, हेल्थ एक्सपर्ट्स लगातार प्लाज्मा थेरेपी (plasma therapy) के असरदार नहीं होने की बात कहते आ रहे थे.

कोरोना (covid) महामारी में लोग इस वक्त इतने उतावले और बेचैन हैं कि अगर आज ये अफवाह फैला दी जाए की गर्म पानी में नींबू डालकर दिन में 10 बार नहाने से कोरोना ठीक हो जाएगा तो लोग यह भी करना शुरू कर देंगे. लेकिन चलो देर आए दुरुस्त आए वरना रोज़ मुझे 10 से 15 लोगों के मेसेज और फोन आ जाते थे प्लाज़मा (plasma) डोनेट करने के लिए और डोलर दिलवाने के लिए.

अब (ICMR) आईसीएमआर की नई गाइडलाइंस में कोविड (covid) मरीजों के इलाज को तीन भागों में बांटा गया है. इसमें हल्के लक्षण वाले मरीज, मध्यम लक्षण वाले और गंभीर लक्षण वाले मरीज शामिल हैं. हल्के लक्षण वाले मरीजों को होम आइसोलेशन में रहने का निर्देश दिया गया है, जबकि मध्यम और गंभीर संक्रमण वाले मरीजों को क्रमश: कोविड (covid) वॉर्ड में भर्ती और आईसीयू (ICU) में भर्ती करने के लिए कहा गया है.

पिछले दिनों हुई कोरोना संबंधी आईसीएमआर (ICMR) -नेशनल टास्क फोर्स की बैठक में सभी सदस्य इस पक्ष में थे कि कोविड-19 के वयस्क मरीजों के उपचार प्रबंधन संबंधी चिकित्सीय दिशा-निर्देशों से प्लाज्मा (plasma) पद्धति के इस्तेमाल को हटाया जाना चाहिए क्योंकि यह प्रभावी नहीं है और कई मामलों में इसका गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया है. अभी तक की गाइडलाइनलक्षणों की शुरुआत होने के सात दिन के भीतर बीमारी के मध्यम स्तर के शुरुआती चरण में और जरूरतें पूरा करनेवाला प्लाज्मा (plasma) दाता मौजूद होने की स्थिति में प्लाज्मा (plasma) पद्धति के इस्तेमाल की अनुमति थी.

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