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September 24, 2021

कोरोना से पब्लिक त्रस्त सरकार लाचार

कोरोना से पब्लिक त्रस्त सरकार लाचार

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कोरोना महामारी की दूसरी लहर ने पूरे भारत वर्ष को अपने गिरफ्त में ले लिया है। चाहे गाँव हो या शहर देश के हर कोने में आज कोरोना ने दस्तक दे रखी है। सारे सरकारी उपाय या तो नाकाफ़ी सिद्ध हो रहे हैं या बिल्कुल अपर्याप्त हैं। भारत सरकार की चिकित्सकीय दुर्बलता आज खुलकर सामने या गई। यह स्पष्ट हो चुका है, भारतीय चिकित्सा तंत्र पूरी तरह से नाकाफ़ी है और अक्षम है।

अब यह स्पष्ट हो चुका है कि भारत का वर्तमान चिकित्सा तंत्र बिल्कुल अल्प विकसित और असहाय है। यह महामारी जैसी आपदा में पूरी तरह से अपंग और अव्यवस्थित है। भारत सरकार ने कोरोना महामारी के पहले दौर में बड़ी वाहवाही लूटी थी। विश्व स्तर पर भारत ने कई छोटे बड़े देशों में चिकित्सकीय सहायता पहुँचाई थी, यही कारण है की दूसरी लहर की भयावहता के मद्देनजर कई देशों ने भारत की खुले दिल से मदद की है।

पहली लहर में सरकार ने राज्य सरकारों के स्वास्थ्य दायित्व को खुद अपने हाथों में लिया था और बिल्कुल शुरुआत में ही सम्पूर्ण लॉकडाउन लगाकर महामारी को सामुदायिक संक्रमण के स्तर पर जाने से रोक लिया था। लेकिन इस बार केंद्र सरकार ने अपनी जिम्मेदारी राज्य सरकारों के जिम्मे छोड़ रखी थी , परंतु राज्य सरकारें अपने निजी कारणों से इस महामारी से बचाव के संसाधनों का उचित प्रबंध नहीं कर सकी हैं । जिस कारण कुछ राज्यों में तो कोरोना के मरीज आम सुविधाओं के अभाव में अस्पतालों के बाहर ही दम तोड़ दे रहें हैं।

मानवीय संवेदनाओं की अपरिमितीय हत्या हो रही है, लोग असहाय हैं, उनके प्रियजन और नजदीकी लोगों का यह हाल होगा उन्होंने सपनों में भी नहीं सोच था। आज केंद्र और राज्य सरकारों में नूरा – कुश्ती के अलावा लोगों को कुछ भी सामने दिखाई नहीं दे रहा। न तो सरकार की कोई मदद उन्हें मिल रही है, न ही उन्हें सरकार से किसी प्रकार की आस दिखाई दे रही है। सरकार के पास एकमात्र उपाय सामुदायिक टीका करण ही नजर आ रहा है।

टीका करण में भी हम तथाकथित रूप से विश्व में सर्वाधिक टीका उत्पादक देशों में शुमार हैं, मगर आज जब टीका की अत्यधिक आवश्यकता है, हम टीका के लिए विदेशी मदद पर निर्भर हो रहे हैं। हम अपनी आवश्यकता की पूर्ति तक नहीं कर पा रहें हैं। यहाँ तक की टीका आयात करने की कोई केन्द्रीय नीति भी नहीं है, जिससे की केंद्र सरकार द्वारा अपने स्तर से विदेशी सरकारों से तालमेल करके सही दरों पर वैक्सीन की उपलब्धता राज्य सरकारों को प्रदान की जा सके।

अभी तक विभिन्न स्तरों से सुझाव आ रहें हैं कि अनिवार्य अनुप्रमाणन (Compulsory -licensing ) के प्रावधान के तहत भारत में उपलब्ध दोनों वैक्सीन को आम निर्माताओं के हाथ में दे दिया जाए जिससे की टीका उत्पादन बढ़ाया जा सके और कोरोना का टीका अधिक मात्रा में उपलब्ध हो सके और टीका कारण की गति बढ़ाई जा सके।

अभी तक के शोध से यही हाँ निकलता प्रतीत होता है की टीका कारण ही इस बीमारी से बचने के सुगम उपाय है और बिना सम्पूर्ण टीका करण का लक्ष्य प्राप्त किए बिना कोरोना महामारी से निजात मिलना मुश्किल है। इसलिए हमारा यही सुझाव है की केंद्र सरकार इस आपदा की घड़ी में देश के लोगों और राज्य सरकारों से उचित तालमेल बनाकर जल्द से जल्द अनिवार्य टीका कारण के लक्ष्य को पूरा करने का प्रयास करे, इसके अलावा कोई अन्य रास्ता नहीं है। लोगों का विश्वास खोने से कुछ हासिल नहीं होगा।

अंजनी कुमार मिश्र, अधिवक्ता सर्वोच्च न्यायालय , नई दिल्ली

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