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September 24, 2021

FARMER PROTEST : आंदोलनकारी किसानों की जिद लाशें बिछा देगी

FARMER PROTEST : आंदोलनकारी किसानों की जिद लाशें बिछा देगी

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किसान आंदोलन (Farmer protest) अब किसानों के लिए भी खतरा बनता जा रहा है. वक्त रहते इस आंदोलन को कुछ समय के लिए विराम न दिया गया तो ये आंदोलन देश के गांव-गांव में महामारी फैला देगा. धरना स्थल पर दम तोड़ रहे आंदोलनकारी किसान और ये सब हो रहा है किसानों (Farmer) के नेताओं के कोरोना के खिलाफ झूठ फैलाने से.

किसान (Farmer) नेता गुरुनाम सिंह चढ़ूनी ने 21 मार्च को एक विवादित और वाहयाद बयान दिया था. जब आंदोलन शुरू हुआ था तब भी कोरोना था, तो क्या किसान (Farmer) रुक गया था. सरकार के लोग झूठ बोल रहे हैं, कोरोना कोई बीमारी नहीं है, कोरोना एक बहुत बड़ा घोटाला है. मुझे ऐसा लगता है कि जो कोरोना का टीका लगवाएगा वो इनका हो जाएगा, उसके हार्मोन बदल सकते हैं और मुझे ये खतरा भी है कि ये टीके किसान (Farmer) यूनियन के नताओं को ना लगा दें. बस फिर क्या था वहां लोगों ने न कोरोना की परवाह की न वैक्सीन लगाई.

किसान आंदोलन (Farmer protest) से सबसे ज्यादा खतरा पंजाब और हरियाणा के गांव में फैल गया है. क्योंकि धरनों पर हरियाणा व पंजाब के ग्रामीण लोगों की लगातार आवाजाही रहती है. हरियाणा और पंजाब के साथ दिल्ली सीमा पर प्रदर्शन कर रहे दोनों राज्यों के किसान (Farmer) कृषि कानून विरोध करने के चक्कर में कोरोना (Corona) के फैलाव का बड़ा कारण बन रहे हैं. धरनों पर बैठे लोग न तो कोरोना (Corona) की टेस्टिंग कराने को तैयार हैं और न ही वैक्सीनेशन को राजी हैं. इससे ग्रामीण इलाकों में कोरोना (Corona) का न केवल तेजी से फैलाव हुआ है, बल्कि कई लोगों की जान भी चली गई है. बहुत से जिलों के लोगों की इन धरना स्थलों पर आवाजाही बनी हुई है. पिछले एक माह के दौरान इन जिलों के गांवों में जहां 1097 लोगों की सामान्य मृत्यु हुई है, वहीं कोरोना (Corona) की वजह से 174 लोग मौत के आगोश में चले गए हैं.

पंजाब में भी अब खतरे के बादल मंडराने लगे हैं लेकिन कैप्टन तो फिलहाल सब ठीक है की रट लगा रहे हैं. क्योंकि केप्टन को पता है जहां किसान (Farmer) बैठे हैं वहां पर मुझ से ज्यादा नुकसान हरियाणा का है. हरियाणा के गृह एवं स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज का कहना है कि हमने दिल्ली-हरियाणा बार्डर पर जमे किसान (Farmer) संगठनों के लोगों से कोरोना (Corona) की टेस्टिंग और वैक्सीनेशन के लिए बार-बार अपील की. स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और किसान (Farmer) संगठनों के नेताओं की आपस में मीटिंग कराई. लेकिन उन्होंने कोरोना (Corona) की टेस्टिंग कराने से साफ इन्कार कर दिया, और कहा कि हम वैक्सीनेशन के लिए अपने मंच से कोई घोषणा नहीं करेंगे.

स्वास्थ्य विभाग धरना स्थल के पास अपना वैक्सीनेशन कैंप लगा ले. यदि किसी व्यक्ति की इच्छा होगी तो वह टीका लगवा लेगा. अब तक मात्र 1800 लोगों ने टीके लगवाए हैं, जबकि एक भी व्यक्ति ने अपनी टेस्टिंग नहीं कराई. किसानों (Farmer) को आज भी कोरना (Corona) साजिश है बता कर गुमराह किया जा रहा है. किसान (Farmer) किसी बात को सुनने के लिए तैयार नहीं हैं. ज़रा सोचिए अगर किसानों का ऐसा ही रुख रहा तो आने वाले समय में मौतों का अंबार लग जाएगा इसको रोकना केंद्र और राज्यों के बस का नहीं होगा.

अभी स्थिति बिगड़ी थी तो हाहाकार मच गया था और सरकारी मशीनरी फेल हो गई थी. लेकिन उपर वाले की कृपा से हम एक बार तो इस महामारी से किसी तरह निकल आए. अब हमें खुद संभलने की ज़रूरत है और किसानों (Farmer) को भी समझने की की ज़िदा रहेंगे तो आंदोलन फिर हो जाएगा. जिंदा ही नहीं रहेंगे तो आंदोलन किसके लिए. विपक्ष भी समझे किसान आंदोलन (Farmer protest) अब देश के लिए अच्छा नहीं. क्योंकि इस वक्त देश को एक साथ मिलकर कोरोना (Corona) महामारी से लड़ने की ज़रूरत है ना कि किसान आंदोलन (Farmer protest) के चलाने की.

दुष्यंत चौटाला ने भी कहा कि नेताओं को कोरोना (Corona) महामारी का ध्यान रखते हुए किसानों (Farmer) के जीवन से खिलवाड़ नहीं करना चाहिए. कुंडली और टीकरी बार्डर हाट स्पाट बने हुए हैं. कोरोना (Corona) से जंग जीतेंगे तो आपस में लड़ लेंगे पक्ष विपक्ष सबको मिलकर किसानों (Farmer) को समझाने की ज़रूरत है और किसानों (Farmer) को भी समझने की तभी देश सुरक्षित रह पाएगा.

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