Trending News

June 23, 2021

एलोपेथ और आयुर्वेद में बेहतर कौन? रामदेव के सवाल कितने सही !!

एलोपेथ और आयुर्वेद में बेहतर कौन? रामदेव के सवाल कितने सही !!

LIKE THIS POST SHARE THIS POST WITH FAMILTY AND FRIENDS

योग गुरु बाबा रामदेव (RAMDEV) के एक बयान के बाद देश में मुद्दा गर्मा गया है कि एलोपेथ और आयुर्वेद (Ayurveda) में सर्वश्रेष्ट कौन. इस मुद्दे पर बहस तो होनी नहीं चाहिए थी. कहीं इस कोरोना काल में भी में सर्वश्रेष की लड़ाई देश को भारी न पड़ जाए. रामदेव (RAMDEV) के कथित एलोपैथी वाले बयान के बाद खड़ा हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है.

बाबा रामदेव (RAMDEV) ने भले ही बयान वापस ले लिया हो लेकिन उनके एलोपैथी (Allopathic) डॉक्टर्स और फार्मा कंपनियों को भेजे गए खुले पत्र के बाद मामला और बिगड़ गया है. देश में नई बहस छिड़ गई है कुछ लोग रामदेव (RAMDEV) के पक्ष में हैं तो कुछ एलोपेथ (Allopathic) के लेकिन हम निष्पक्ष हैं. मुझे तो आज के हालात को देख कर ऐसा लगता है कि अगला विश्व युद्ध ऐलोपैथियों, आयुर्वेदियों (Ayurveda) और होम्योपैथीयों के बीच होगा. हकीकत तो ये है कि चाहे वो कोई भी फार्मा कंपनियां हों. लूट दोनों में है चाहे वह आयुर्वेदिक (Ayurveda) हो या एलोपैथिक (Allopathic).

जिन दवाइयों की ज़रूरत के समय डिमांड बढ़ती है आयुर्वेदिक (Ayurveda) कंपनियां भी लूट में शामिल हो जाती हैं. बाबा रामदेव (RAMDEV) और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन वाले विवाद में गलती दोनों पक्षों की है. बाबा रामदेव (RAMDEV) कई बार बोलते बोलते कंट्रोल खो देते हैं कि कब किस मौके पर उन्हें क्या बोलना चाहिए कितना बोलना चाहिए. उनके अंदर बड़बोलेपन की आदत शुरू से है. लेकिन इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि उन्होंने योग और आयुर्वेद को एक शानदार मुकाम तक पहुंचाया एक संघर्ष में जिंदगी जीते हुए इतना साम्राज्य खड़ा करना कोई आसान काम नहीं है.

एलोपैथिक (Allopathic) इस वक्त विश्व में सबसे प्रचलित विधा है. आयुर्वेद (Ayurveda) का भी अपना स्थान है लेकिन आज के दौर में है जहां किसी के पास वक्त नहीं है वहां तुरंत रिजल्ट के लिए लोग एलोपैथिक (Allopathic) पर ही निर्भर हैं. वैसे देखा जाए तो आयुर्वेद (Ayurveda) सबसे पुरानी चिकित्सा पद्धति है फिर दूसरी तमाम चिकित्सा पद्धतियां आएं हमारा लक्ष्य मरीजों की बीमारों की भलाई है चाहे वह यूनानी से ठीक हो या आयुर्वेदिक (Ayurveda) से ठीक हो या एलोपैथिक (Allopathic) से ठीक हो या होम्योपैथिक से ठीक हो.

लेकिन एक दूसरे को नीचा दिखाना एक दूसरे के बारे में गलत बातें करना यह बंद होना चाहिए. दोनों पक्षों से मृत्यु को लेकर भी गलत बातें कही जा रही हैं कुछ लोग लिख रहे हैं कि बाबा रामदेव (RAMDEV) के आयुर्वेदिक (Ayurveda) विभाग के प्रमुख का कोरोना से निधन हुआ तो आयुर्वेदिक (Ayurveda) वाले प्रहार कर रहे हैं कि डॉ अग्रवाल का निधन हुआ तो दोनों पक्षों से मेरा यही कहना है कि आप इस विवाद के बजाए कितने लोगों को आपने बचा सके इस पर बात हो वरना मरना तो एक दिन सब ने है.

कोई भी “पैथी” बुरी नहीं होती है, वर्षों से लोग आयुर्वेद (Ayurveda), होम्योपैथ, यूनानी सभी पर भरोसा करते आए हैं. असल में वर्तमान झगड़ा आयुर्वेद (Ayurveda) और एलोपैथ (Allopathic) में नहीं है, ये “गेम” कुछ और है.. बाबा रामदेव (RAMDEV) तो स्वयं ही अपनी मार्केटिंग के चलते इस इंटरनेशनल गेम में जबरन घुस आए हैं,

अब थोड़ा एलोपेथ (Allopathic) पर बात कर लेते हैं. पहले बोला HydroxyChloroquine जबरदस्त है, फटाफट भारत ने ट्रम्प महोदय को लाखों डोज़ भिजवा दिए, अमेरिकियों ने भकोस भी लिए. फिर बोला कि नहीं ये ठीक नहीं है, Remdesivir लगाते हैं, हमारे अपनों ने इस इंजेक्शन को रामबाण समझकर बीस-पच्चीस हजार रुपए से लेकर 1 लाख रुपए देकर भी इंजेक्शन लगवाए. फिर बोला कि रेमाडेसीवीर (Remdesivir) इतना अच्छा नहीं है, प्लाज्मा थेरेपी करते हैं.

लोगों ने दिन रात पैसा खर्च कर प्लाज्मा का इंतज़ाम किया. फिर ICMR ने बोल दिया कि ये थेरेपी भी बढ़िया नहीं है, इस बीच मरने वाले मरीज तो मर गए, बचने वाले “किस्मत से” बच गए, अब ये बोल रहे हो कि स्टेरॉइड देने और आक्सिजन सिलेंडर ठीक से नहीं लगाने के कारण ब्लैक-व्हाईट, यलो फंगस पैदा हो रहा है, तो अब बेचारा मरीज़ क्या करे किस पर भरोसा करे.

कहने का मतलब ये है कि सभी प्रकार की थेरेपियों के प्लस और माईनस पाईंट होते हैं, बाबा रामदेव (RAMDEV) के शिविर में हमने सैकड़ों नामचीन चिकित्सकों को जमीन पर बैठकर अनुलोम-विलोम करते और अश्वगंधा वटी खाते हुए देखा हुआ है. वहीं दूसरी तरफ एक मरीज से एक PPE KIT के 1500 रुपए वसूलते भी हमने देखा है, जबकि उसी एक PPE किट को पहनकर आपने पचास मरीज देख डाले और सभी मरीजों के बिल मे उस “PPE KIT” के पैसे जोड़ दिए.

एलोपेथी (Allopathic) में लूट इतनी है की गरीब इलाज के नाम पर ही मर जाता है, वहीं आयुर्वेद (Ayurveda) में कम से कम उसका पैसा तो बच जाता है. अगर मरीज़ बचेगा तो फिर जीवन चला लेगा. वहीं एलोपेथ (Allopathic) में बच भी गया तो कर्जे तले जीवन में पल पल मरेगा. अगर इसमें बहस न करके दौनो पद्दतियों से मरीज़ो के लिए काम किया जाए तो देश का भला हो. लेकिन अगर सिर्फ पैसा कमाने के लिए ही विवाद हो तो नुकसान भी देश का ही होगा.’

ये भी पढ़े :- एलोपैथी को ‘Stupid or Diwalia Science’ कहने से नाराज IMA,रामदेव पर केस की मांग

For more updates click

👉🏾👉🏾 The Quality News

Enable Notifications    Subscribe us for regular updates !! No